भाववाचक संज्ञा
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भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun) हिन्दी व्याकरण में एक श्रेणी है जो किसी भाव, गुण, अवस्था, या अमूर्त विचार का नाम होती है। ये संज्ञाएँ वास्तविक या भौतिक रूप में नहीं होतीं, बल्कि मानसिक अनुभवों और विचारों को दर्शाती हैं।
भाववाचक संज्ञा की उदाहरण:
- भाव: प्रेम (love), द्वेष (hatred), खुशी (happiness), दुःख (sorrow)
- गुण: ईमानदारी (honesty), साहस (courage), बुराई (evilness), अच्छाई (goodness)
- अवस्था: बचपन (childhood), बुढ़ापा (old age), यौवन (youth)
- अवधारणाएँ: स्वतंत्रता (freedom), न्याय (justice), सत्य (truth)
भाववाचक संज्ञा की विशेषताएँ:
- अमूर्तता: ये संज्ञाएँ भौतिक रूप में नहीं होतीं और इन्हें छूया या देखा नहीं जा सकता।
- विवरणात्मक: ये संज्ञाएँ किसी भावना, गुण, या विचार का वर्णन करती हैं।
- व्यक्तिगत अनुभव: भाववाचक संज्ञाएँ व्यक्तिगत या सामूहिक अनुभवों और भावनाओं को दर्शाती हैं।
उदाहरण:
- सच्चाई सबसे बड़ी शक्ति है। (सच्चाई - भाववाचक संज्ञा)
- साहस की आवश्यकता हर कठिनाई में होती है। (साहस - भाववाचक संज्ञा)
- बचपन के दिन सबसे यादगार होते हैं। (बचपन - भाववाचक संज्ञा)