गुरुत्वाकर्षण

विकिविश्वविद्यालय से
Jump to navigation Jump to search

साँचा:Lecture

गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) द्रव्यमानो की वस्तुओं के बीच आकर्षण का मूल बल हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में, गुरुत्वाकर्षण को सामान्यतः किसी वस्तु के भार के रूप में माना जाता हैं।

गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक का न्यूटन का नियम।।

ब्रह्मांड में द्रव्यमान के साथ सभी कणों के मध्य विद्यमान आकर्षण मूल बल है।

गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी और अन्य ग्रहों को सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षाओं में रखता हैं। यह चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में रखता हैं। यह ज्वार, संवहन और कई अन्य वस्तुओं का कारण बनता हैं। गुरुत्वाकर्षण का ही कारण है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी, सूर्य और अन्य अधिकांश वस्तु विद्यमान हैं। इसके बिना, द्रव्य द्रव्यमानो के रूप में एक साथ नहीं आएंगे। गुरुत्वाकर्षण के बिना, जीवन अस्तित्व में नहीं होगा।

भौतिकी सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत के उपयोग से गुरुत्वाकर्षण का वर्णन करता हैं। न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम सापेक्षता के सिद्धांत के समान है, लेकिन बहुत सरल है।

"गुरुत्व" शब्द का प्रयोग अक्सर "गुरुत्वाकर्षण" के लिए किया जाता हैं। विज्ञान में, "गुरुत्व" और "गुरुत्वाकर्षण" शब्द अलग-अलग रूप से उपयोग किया जाता हैं। "गुरुत्वाकर्षण" आकर्षण के बारे में सिद्धांत हैं। "गुरुत्व" बल है जो एक-दूसरे के लिए वस्तुए खींचती है।

गैलीलियो के सिद्धांत[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

गैलीलियो कोई भी वस्तु ऊपर से गिरने पर सीधी पृथ्वी की ओर आती है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो कोई अलक्ष्य और अज्ञात शक्ति उसे पृथ्वी की ओर खींच रही है। इटली के वैज्ञानिक, गैलिलीयो गैलिलीआई ने सर्वप्रथम इस तथ्य पर प्रकाश डाला था कि कोई भी पिंड जब ऊपर से गिरता है तब वह एक नियत त्वरण (constant acceleration) से पृथ्वी की ओर आता है। त्वरण का यह मान सभी वस्तुओं के लिए एक सा रहता है। अपने इस निष्कर्ष की पुष्टि उसने प्रयोगों और गणितीय विवेचनों द्वारा की है।

केप्लर का नियम[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

केप्लर की ग्रहीय गति के नियम केप्लर की ग्रहीय गति के नियम देखिये

जर्मन खगोलविद केप्लर ने ग्रहों की गति का अध्ययन करके तीन नियम दिये।

  1. केप्लर का प्रथम नियम: (कक्षाओं का नियम) -सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगते हैं तथा सूर्य उन कक्षाओं के फोकस पर होता है।
  2. द्वितीय नियम - किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल पार करती है। अर्थात प्रत्येक ग्रह की क्षेत्रीय चाल (एरियल वेलासिटी)नियत रहती है। अर्थात जब ग्रह सूर्य से दूर होता है तो उसकी चाल कम हो जाती है।
  3. तृतीय नियम : (परिक्रमण काल का नियम)- प्रत्येक ग्रह का सूर्य का परिक्रमण काल का वर्ग उसकी दीर्घ वृत्ताकार कक्षा की अर्ध-दीर्घ अक्ष की तृतीय घात के समानुपाती होता है।

भास्कराचार्य का गुरुत्वाकर्षण का नियम[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

गुरुत्वाकर्षण: "पिताजी, यह पृथ्वी, जिस पर हम निवास करते हैं, किस पर टिकी हुई है?" लीलावती ने शताब्दियों पूर्व यह प्रश्न अपने पिता भास्कराचार्य से पूछा था। इसके उत्तर में भास्कराचार्य ने कहा, "बाले लीलावती !, कुछ लोग जो यह कहते हैं कि यह पृथ्वी शेषनाग, कछुआ या हाथी या अन्य किसी वस्तु पर आधारित है तो वे गलत कहते हैं। यदि यह मान भी लिया जाए कि यह किसी वस्तु पर टिकी हुई है तो भी प्रश्न बना रहता है कि वह वस्तु किस पर टिकी हुई है और इस प्रकार कारण का कारण और फिर उसका कारण... यह क्रम चलता रहा, तो न्याय शास्त्र में इसे अनवस्था दोष कहते हैं।लीलावती ने कहा फिर भी यह प्रश्न बना रहता है पिताजी कि पृथ्वी किस चीज पर टिकी है?तब भास्कराचार्य ने कहा, क्यों हम यह नहीं मान सकते कि पृथ्वी किसी भी वस्तु पर आधारित नहीं है।..... यदि हम यह कहें कि पृथ्वी अपने ही बल से टिकी है और इसे गुरुत्वाकर्षण शक्ति कह दें तो क्या दोष है?इस पर लीलावती ने पूछा यह कैसे संभव है। तब भास्कराचार्य सिद्धान्त की बात कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है।

मरुच्लो भूरचला स्वभावतो यतो विचित्रावतवस्तु शक्त्य:॥ --- सिद्धांतशिरोमणि, गोलाध्याय - भुवनकोश आगे कहते हैं- आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या। आकृष्यते तत्पततीव भाति समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे॥ --- सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं। पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं।

अन्य वेबसाइटें[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]